चुनावी माहौल के बीच पुलवामा हमले का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर हुए आतंकी हमले को साजिश बताते हुए मौजूदा सरकार को घेरा है और कहा है कि वोट के लिए जवानों को मार दिया गया. यहां तक कि उन्होंने यह भी कह दिया कि जब सरकार बदलेगी तो इस मामले की जांच की जाएगी, तब बड़े-बड़े लोग इसमें फंसेंगे.
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को जम्मू से श्रीनगर जा रहे सीआरपीएफ जवानों का 70 से ज्यादा गाड़ियों का काफिल जा रहा था. इसी दौरान विस्फोटक से भरी एक कार ने टक्कर मारी थी, जिसमें 40 जवान शहीद हुए थे. हमले के बाद तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर जवानों के खून पर राजनीति करने का आरोप लगाया था. जबकि कुछ नेताओं ने बड़े अधिकारियों के नाम पर भी सवाल उठाए थे. अब समाजवादी पार्टी नेता ने साफ शब्दों में पुलवामा हमले को साजिश बताते हुए इसकी जांच करने की बात कही है.
होली मिलन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, 'पैरामिलिट्री फोर्स सरकार से दुखी हैं. वोट के लिए जवान मार दिए गए. जम्मू-श्रीनगर के बीच चेकिंग नहीं की थी. जवानों को सादी बस में भेजा गया, ये साजिश थी.' इससे आगे उन्होंने कहा कि इस साजिश के बारे में अभी कुछ नहीं कहना चाहता हूं लेकिन जब सरकार बदलेगी, इस मामले की जांच होगी और बड़े-बड़े लोग फंसेंगे. रामगोपाल यादव से पहले पश्चिम बंगाल से भी मोदी सरकार के खिलाफ ऐसी आवाज उठ चुकी है.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर शहीद जवानों के खून से राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि सरकार को पुलवामा हमले के बारे में पहले से जानकारी थी, लेकिन फिर भी जवानों को सड़क मार्ग की जगह हवाई मार्ग से नहीं भेजा गया. ममता के उस गंभीर आरोप के बाद अब रामगोपाल यादव ने एक कदम आगे बढ़ते हुए यह भी कह दिया कि मई में जब सरकार बदलेगी को इस केस की जांच की जाएगी और इस मामले में बड़े-बड़े लोग फंसेंगे.
पाकिस्तान की सेना की तरफ से ही सबसे पहले इन हवाई हमलों की पुष्टी की गई और उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन मात्र बताया था. उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री टीवी पर आए और उन्होंने चेतावनी भरे लहज़े में कहा कि वे इसका बदला लेंगे..
अगर हम इतिहास के पन्ने पलटें तो हमेशा से ही भारत का रुख शांति की ओर रहने वाले देश के तौर पर ही दिखा है. फिर चाहे वह 1993 में हुए मुंबई बम धमाके हों या साल 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले की बात हो.
साल 2008 में मुंबई के ताज होटल पर हुए हमले के बाद भी भारत का रुख़ बहुत अधिक उग्र नहीं रहा. आमतौर पर भारत सरकार ने ऐसे हमलों के बाद पाकिस्तान के साथ व्यापार रोकने और क्रिकेट सिरीज़ टालने करने जैसे फ़ैसले लिए.
लेकिन बीते कुछ सालों में भारत के रुख़ में भी बदलाव देखा गया है. उड़ी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की बात कही और अब पुलवामा हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने एयरस्ट्राइक की.
रक्षा जानकार मानते हैं कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश परमाणु हथियारों से संपन्न हैं ऐसे में वे किसी घोषित युद्ध की तरफ़ नहीं बढ़ना चाहेंगे. बल्की इस तरह की छिट-पुट लड़ाइयां दोनों देशों के बीच देखने को मिलती रहेंगी.
भारत की एयरस्ट्राइक पर हालांकि पाकिस्तान सहित कुछ अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों ने सवाल भी उठाए और कहा कि इन हवाई हमलों से कोई नुक़सान नहीं हुआ.
वहीं भारतीय वायुसेना के उस दावे पर भी पाकिस्तान ने सवाल उठाए जिसमें कहा गया था कि भारत ने पाकिस्तान के आधुनिक लड़ाकू विमान एफ़-16 को मार गिराया
Thursday, March 21, 2019
Thursday, March 7, 2019
रफ़ाल आने में देरी अनिल अंबानी की वजह से हुई: राहुल गांधी
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में बुधवार को एक प्रेस वार्ता कर कहा कि रफ़ाल मामले में भ्रष्टाचार हुआ है और आरोप लगाया कि खुद प्रधानमंत्री ने अपने मित्र अनिल अंबानी को फ़ायदा पहुंचाया है.
उन्होंने सवाल किया कि रफ़ाल डील से जुड़े कागजों का ग़ायब हो जाना कोई साधारण बात नहीं है.
उन्होंने कहा कि मोदी राज में सब कुछ ग़ायब हो रहा है. उन्होंने कहा, "दो करोड़ युवाओं को रोज़गार, किसानों को सही दाम मिलना था वो ग़ायब हो गया, 15 लाख रुपयों का वादा, किसानों के बीमा का पैसा, डोकलाम का मुद्दा, नोटबंदी और जीएसटी में लोगों का कारोबार ग़ायब हो गया और फिर रफ़ाल की फाइलें ग़ायब हो गईं."
राहुल गांधी ने कहा "अनिल अंबानी को तीस हज़ार करोड़ रुपये मिल सकें इसीलिए रफ़ाल डील में देरी की गई. हमारी (यूपीए) सरकार की डील के अनुसार होता को अब तक रफ़ाल विमान भारत में होता."
उन्होंने आरोप लगाया, "किसी भी चीज़ को तोड़-मरोड़ कर पेश करना है और बचाना है. मूल मंत्र यही है कि चौकीदार को बचाना है."
पीएम की जाँच क्यों नहीं?
राहुल गांधी ने कहा कि डील से जुड़े कागज़ों में दिखाया है कि पीएमओ रफ़ाल डील के बारे में पैरलल नेगोशिएशन (दूसरे रास्ते से एक और बातचीत) कर रहे थे.
उनका कहना था कि ये भ्रष्टाचार का सीधा-सादा मामला है. रक्षा मंत्रालय से साफ़ तौर पर रिपोर्ट में लिखा है, "पीएमओ इज़ कैरिंग आउट पैरलल नेगोशिएशन".
इस पर प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला बनता है तो उनके ख़िलाफ़ जांच क्यों नहीं होती.
उन्होंने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि इस डील में उनकी कोई भूमिका नहीं है तो वो खुद की जांच के लिए सामने क्यों नहीं आते?
रफ़ाल डील के अलावा प्रधानमंत्री ने खुद रात को डेढ़ बजे सीबीआई प्रमुख को हटाया, कोर्ट के उन्हें दोबारा नियुक्त करने के बाद उन्हें फिर हटा दिया गया. इन सभी मामलों में प्रधानमंत्री की भी जांच होनी चाहिए.
राहुल गांधी ने द हिंदू अख़बार की उस रिपोर्ट की ज़िक्र किया जिसमें कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय को 21 जुलाई 2016 को सात सदस्यीय भारतीय नेगोशिएन टीम में कहा गया था कि पैरलल नेगोशिएशन चलने के कारण फ्रांस की इस डील में स्थिति मज़बूत बनी.
फ्रांस सरकार ने बैंक गारंटी देने से इनकार किया और इस कारण 36 रफ़ाल विमानों की कीमत करीब 246.11 मिलियन यूरो (पिछली यूपीए सरकार के साथ हुए करार में तय हुई कीमत के मुकाबले) बढ़ गई.
द हिंदू की एक अन्य रिपोर्ट में ये कहा गया है कि समाचार एजेंसी एएफ़पी को 2018 में दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि रफ़ाल डील में चल रही चर्चा में रिलायंस ग्रुप का एक नया नाम आया है जिसका फ़ैसला सत्ता में ने के बाद मोदी सरकार ने किया था.
इसके बाद द हिंदू के चेयरमैन और वरिष्ठ पत्रकार के ख़िलाफ़ सरकार ने ऑफ़िशयल सीक्रेट्स ऐक्ट के तहत गुप्त दस्तावेज़ सार्वजनिक करने के आरोप लगाए.
राहुल गांधी ने कहा कि द हिंदू की रिपोर्ट में स्पष्ट दिखाया है कि प्रधानमंत्री खुद डील पर बातचीत कर रहे थे, राफ़ेल की तारीख आगे बढ़ाई गई और फिर राफ़ेल के दाम भी बढ़ाए गए.
लेकिन ऑफ़िशयल सीक्रेट्स ऐक्ट का उल्लघंन करने के आरोप में उन पर मुकदमा कराने की धमकी बात कही जा रही है.
उन्होंने सवाल किया कि रफ़ाल डील से जुड़े कागजों का ग़ायब हो जाना कोई साधारण बात नहीं है.
उन्होंने कहा कि मोदी राज में सब कुछ ग़ायब हो रहा है. उन्होंने कहा, "दो करोड़ युवाओं को रोज़गार, किसानों को सही दाम मिलना था वो ग़ायब हो गया, 15 लाख रुपयों का वादा, किसानों के बीमा का पैसा, डोकलाम का मुद्दा, नोटबंदी और जीएसटी में लोगों का कारोबार ग़ायब हो गया और फिर रफ़ाल की फाइलें ग़ायब हो गईं."
राहुल गांधी ने कहा "अनिल अंबानी को तीस हज़ार करोड़ रुपये मिल सकें इसीलिए रफ़ाल डील में देरी की गई. हमारी (यूपीए) सरकार की डील के अनुसार होता को अब तक रफ़ाल विमान भारत में होता."
उन्होंने आरोप लगाया, "किसी भी चीज़ को तोड़-मरोड़ कर पेश करना है और बचाना है. मूल मंत्र यही है कि चौकीदार को बचाना है."
पीएम की जाँच क्यों नहीं?
राहुल गांधी ने कहा कि डील से जुड़े कागज़ों में दिखाया है कि पीएमओ रफ़ाल डील के बारे में पैरलल नेगोशिएशन (दूसरे रास्ते से एक और बातचीत) कर रहे थे.
उनका कहना था कि ये भ्रष्टाचार का सीधा-सादा मामला है. रक्षा मंत्रालय से साफ़ तौर पर रिपोर्ट में लिखा है, "पीएमओ इज़ कैरिंग आउट पैरलल नेगोशिएशन".
इस पर प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला बनता है तो उनके ख़िलाफ़ जांच क्यों नहीं होती.
उन्होंने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि इस डील में उनकी कोई भूमिका नहीं है तो वो खुद की जांच के लिए सामने क्यों नहीं आते?
रफ़ाल डील के अलावा प्रधानमंत्री ने खुद रात को डेढ़ बजे सीबीआई प्रमुख को हटाया, कोर्ट के उन्हें दोबारा नियुक्त करने के बाद उन्हें फिर हटा दिया गया. इन सभी मामलों में प्रधानमंत्री की भी जांच होनी चाहिए.
राहुल गांधी ने द हिंदू अख़बार की उस रिपोर्ट की ज़िक्र किया जिसमें कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय को 21 जुलाई 2016 को सात सदस्यीय भारतीय नेगोशिएन टीम में कहा गया था कि पैरलल नेगोशिएशन चलने के कारण फ्रांस की इस डील में स्थिति मज़बूत बनी.
फ्रांस सरकार ने बैंक गारंटी देने से इनकार किया और इस कारण 36 रफ़ाल विमानों की कीमत करीब 246.11 मिलियन यूरो (पिछली यूपीए सरकार के साथ हुए करार में तय हुई कीमत के मुकाबले) बढ़ गई.
द हिंदू की एक अन्य रिपोर्ट में ये कहा गया है कि समाचार एजेंसी एएफ़पी को 2018 में दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि रफ़ाल डील में चल रही चर्चा में रिलायंस ग्रुप का एक नया नाम आया है जिसका फ़ैसला सत्ता में ने के बाद मोदी सरकार ने किया था.
इसके बाद द हिंदू के चेयरमैन और वरिष्ठ पत्रकार के ख़िलाफ़ सरकार ने ऑफ़िशयल सीक्रेट्स ऐक्ट के तहत गुप्त दस्तावेज़ सार्वजनिक करने के आरोप लगाए.
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लेकिन ऑफ़िशयल सीक्रेट्स ऐक्ट का उल्लघंन करने के आरोप में उन पर मुकदमा कराने की धमकी बात कही जा रही है.
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